ये नरसंहार कर अत्याचार/ heart touching Hindi poem

Yadon ka sawan

“मन विचलित हो लिखूं व्यथा,
जो धर्म विचलित हो करूं मैं क्या!!”- जी. एल.

ये पंक्तियां आज के समाज के लिए लिखीं गयी है!!

ये नरसंहार कर अत्याचार!!

ये नरसंहार कर अत्याचार!
जला दी बिटिया का संसार!!
खोल के तू पाप का द्वार!
करें मानवता का संहार!!
बनके तू निशाचर का अवतार!
करता मासूमों से बलात्कार!!
बनके पापियों का दास!
मचाया तूने हाहाकार!!
हे कलयुगी निशाचर तूने!
किया इंसानियत को शर्मशार!!

कानून का तुझको भय नहीं!
तू करता उसपे वज्र प्रहार!!
क्या तेरा धर्म में कहता !
देता तुझको कौन अधिकार!!
लाख व्रत, रोज़ा रख लेना!
फलित ना होगा किसी प्रकार!!
या खुदा तेरी यहीं खुदाई!
सबके दिल में है व्यभिचार!!
ये नरसंहार कर अत्याचार!
जला दी बिटिया का संसार!! -जी. एल.

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“Be mindful, write misery, What religion should I get distracted? “- G.L.

These lines are written for today’s society !!

These massacre do tortures !!
These genocide tortures! Burnt’s world!
Open the door of sin!
Defeat of humanity !!
Be you Nocturnal Avatar!
Rape from the innocent !!
Slave of sinners!
You made hahakaar!!
O kalyugi nishachar you! Sharmashar made humor !!
Do not fear the law!
You do that thunderbolt !!
What your religion says!
Who gives you authority !!
Lakh fast, fasting! Somehow it will not happen !!
Or do your excavation right here!
Everyone’s heart is in adultery!
These genocide tortures! Burnt’s world!!-
G L.

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