श्रद्धांजलि कविता/ poem on Surat fire in takshashila

सुरत तक्षशिला अग्निकांड

“ये कविता नहीं दर्द के प्याले हैं!
एक कवि की कलम पे उभरे हुए छाले हैं!!”- जी. एल.

सुरत अग्निकांड के मौत के मंजर
को चरितार्थ करती ये चंद लाइनें:

देखते रहे मौत का मंजर हाथों में दूरभाष लिये!
फूलों का जनाजा निकला आग का उच्छ्वास लिये!!
हृदयविदारक घटना यह सुरत का मंजर था!
सबके हाथ मोबाइल थी और मौत का तांडव था!!
कई जानें बच जाती इक चादर भी तान दिया होता!
इंसान होकर गर इंसानियत का पैगाम दिया होता!!
कई जिंदगियां बुझ गई मन में मदद की आस लिये!
फूलों का जनाजा निकला आग का उच्छ्वास लिये!!
सब थे कोस रहे सत्ता को हाथ पे हाथ धरे बैठे!
भूल कर अपने कर्तव्यों को विडियो क्लिप बना बैठे!!
आज के युग में क्या ये मानवता का सूचक है?
कहे कवि ‘प्रेम’ आज ये कलयुग का द्योतक है!!
शुक्रवार का काला दिन था मौत का संत्रास लिये!
फूलों का जनाजा निकला आग का उच्छ्वास लिये!! -जी एल.(प्रेम)

भावपूर्ण श्रद्धांजलि:
श्रद्धांजलि में जब उनकी याद आई होगी!
अश्रुओं ने पलकों को भिगोई होगी!!
देखकर ये हृदयविदारक मंजर!
आसमां भी चुपके से रोई होगी!!-जी एल.

Read also>>>>> http://yadonkasawan.com/पुलवामा-शहिदों-को-श्रद्ध/

Read also>>>>> http://yadonkasawan.com/जी-करता-है-सो-जाऊँ-फिर-से-hindi-poem-on-happy-m/

Read also>>>>> http://yadonkasawan.com/sad-shayari-बेवफाई-शायरी/

News of Surat agnikand in Hindi>>>> https://www.google.com/amp/s/khabar.ndtv.com/news/india/surat-fire-man-enters-burning-building-to-save-trapped-students-2043105/amp/1%3fakamai-rum=off

2,622 total views, 1 views today

Leave a Reply

Your email address will not be published.